पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने ड्रग्स मामले में जेल में बंद अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को जमानत दी
जेल में बंद शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को बड़ी राहत देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को उन्हें ड्रग्स से जुड़े एक मामले में नियमित जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति एम एस रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति सुरेश्वर ठाकुर की पीठ ने उनकी याचिका पर फैसला पहले सुरक्षित रख लिया था।
मजीठिया ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के प्रावधानों के तहत पिछले साल 20 दिसंबर को उनके खिलाफ दायर मामले में नियमित जमानत की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था। मजीठिया ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि राज्य में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसका दुरुपयोग किया था। अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ अपनी शक्ति और स्थिति और याचिकाकर्ता कभी ऐसा लक्ष्य था।
मजीठिया ने दलील दी थी, "मौजूदा सरकार ने भी याचिकाकर्ता को और निशाना बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।" उन्होंने आरोप लगाया था कि वर्तमान मामला स्पष्ट रूप से राजनीतिक प्रकृति का है। मजीठिया ने तर्क दिया था कि जिस दिन से, चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली सरकार ने पद ग्रहण किया, उसके पदाधिकारी याचिकाकर्ता को झूठे मामले में फंसाने पर तुले हुए थे।
मजीठिया राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार से आते हैं, और 2007 में पहली बार मजीठिया निर्वाचन क्षेत्र से जीते थे। उन्होंने 2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में सीट बरकरार रखी।
वह 2007 और 2017 तक अकाली दल सरकार में मंत्री रहे हैं और पर्यावरण और विज्ञान और प्रौद्योगिकी और एनआरआई मामलों के विभागों को संभाला है।

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